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रासो साहित्य ( आदिकाल ) Hindi literature


  • रासो साहित्य- " रासो " शब्द की व्युत्पत्ति को लेकर विद्वानों में मतभेद है ।
  • फ्रांसीसी इतिहासकार  गार्सा- द- तासी ने रासो शब्द की व्युत्पत्ति " राजसूय " से मानी है।
  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने " रसायण " शब्द से मानी है ।
  • नरोत्तम स्वामी ने रासो शब्द की व्युत्पत्ति " रसिक " शब्द से मानी है।
  • आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी व चंद्रबली पांडेय ने संस्कृत के " रासक " शब्द से ही रासो शब्द की व्युत्पत्ति मानी है ।


  • प्रमुख रासो साहित्य -
  1. खुमान रासो - इसका समय 9वीं शताब्दी है कुछ विद्वान इसका समय 17वीं शताब्दी मानते हैं । इसे चित्तौड़गढ़ नरेश खुमाण के समकालीन कवि दलपत विजय द्वारा रचित माना है इसकी भाषा डिंगल है ।
  2. हम्मीर रासो - इसका समय 13वीं शताब्दी है इसके रचनाकार कवि शाड़र्गगधर है इसमें रणथंभौर के राव हमीर देव चौहान के शौर्य, अलाउद्दीन खिलजी द्वारा 1301 ईसवी में रणथंभौर पर किए गए आक्रमण का वर्णन है । प्राकृत पैैैैंगलम में इसके कुछ छंद मिलते है ।
  3. बीसलदेव रासो - इसके रचनाकार कवि नरपति नाल्ह है । इसका समय कुछ विद्वानों ने 1272 विक्रम संवत माना है तो कुछ ने 1212 विक्रम संवत माना है । इसमें अजमेर के चौहान वंश के राजा बीसलदेव का विवाह मालवा के राजा भोज परमार की पुत्री राजमती से होने का उल्लेख है ।
  4. परमाल रासो - इसका रचनाकार कवि जगनिक है। इस रचना का समय 13वीं शताब्दी है । इसमें बनाफर शाखा के दो वीर आल्हहा व ऊदल के शौर्य का वर्णन है ।
  5. विजयपाल रासो -  इसकी रचना कवि नल्ह सिंह ने की है। इसमें 42 छंद है राजा विजयपाल की यात्राओं का वर्णन है ।
  6. पृथ्वीराज रासो - इसके रचनाकार कवि चंदबरदाई है इसमें 713 सर्ग है । इसको इनके पुत्र जल्हहण ने पूरा किया ।
  • आदिकाल की अन्य रचनाएं एवं कवि - 
  1. संदेश रासो - इसके रचनाकार अब्दुर्रहमान (अद्हमाण ) है इसमें ए विरहिणी की वियोग की मार्मिकता है ।
  2. प्राकृत पैंगलम - इस ग्रंथ के संकलन कर्ता लक्ष्मीधर है इसमें विद्याधर, शार्ड़गधर, जज्जल एवं बब्बर आदि कवियों की रचनाा संग्रह है ।
  3. ढोला मारू रा दूहा - यह 11वीं शताब्दी की एक महत्वपूर्ण रचना है । कवि कुशललाभ द्वारा  रचित राजस्थानी भाषा का एक प्रेमाख्यान काव्य है । इसमें ढोला नामक राजकुमार और मारवणी नामक राजकुमारी की प्रेम कथा है ।
  4. खुसरो की पहेलियां - खुसरो का वास्तविक नाम 'अबुल हसन' था । इन्होंने खालिकबारी, पहेलियां लिखी जो लोक साहित्य मेंंं बहुत प्रचलित हुई ।
  5. विद्यापति - आदिकाल के विशिष्ट कवि मैथिली कोकिल विद्यापति का जन्म बिहार के दरभंगा जिले के गांव  विसपी में हुआ। इनकी प्रमुख रचनाएं - "कीर्तिलता",  "कीर्तिपताका", "विद्यापति पदावली" है । इन को " अभिनव जयदेव " भी कहते हैं ।
R.k pidiyar

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