- रामराज्य ( Ramrajya ) - राम राज्य की अवधारणा को लेकर विभिन्न लोगों में मतभेद है कुछ लोग रामराज्य का मतलब हिंदूू राज्य से मानते तो कुछ भगवान श्रीराम से इसका संबंध जोड़ते हैं जबकि रामराज एक विस्तृत अवधारणा है जिसके आदर्श विचार सार्वभौमिक है । अर्थात हम रामराज्य का अर्थ इस प्रकार ले सकते हैं कि जैसा राज्य भगवान श्री राम के समय था। वैसे राज्य की आधारशिला का निर्माण होना ।
- परिभाषा ( Defination ) - रामराज्य एक ऐसी व्यवस्था का नाम है जहां हर व्यक्ति धर्म का पालन अपनी निष्ठापूर्वक करताा है यहां धर्म का अर्थ पूजा पद्धति से नहीं है बल्कि अच्छे कर्मों से है जो व्यक्ति अपने कर्मों को निष्ठापूर्वक करता है उस व्यक्ति को हम धार्मिक के सकते हैं रामराज्य एक ऐसी कल्पना है जहां हर व्यक्ति अपना जीवन आनंद के साथ बिताता है । राम राज्य के लोगों को किसी प्रकार की बीमारी नहींं होती है क्योंकि रामराज्य का वातावरण प्रदूषण मुक्त होता है इस कारण लोग स्वस्थ रहतेे हैं । तथा यहां कोई व्यक्ति दीन हीन अवस्था में नहीं रहता है ।
- नागरिकों का व्यवहार ( Behavior ) - राम राज्य में सभी लोग आपसी सद्भाव के साथ अपना जीवन व्यतीत करते हैं। और सभी लोग दूसरों की धार्मिक आस्थाओं का सम्मान करते हैं। सभी लोग धर्म के 4 सिद्धांतों का पालन बड़ी निष्ठापूर्वक करते हैं। वे चार सिद्धांत है - सत्य, शुद्धता, दया, दान । रामराज्य का कोई भी नागरिक आलसी नहीं होता है । राम राज्य के सभी नागरिक पुरुषार्थी होते हैं । नागरिक उधार कृतज्ञ होते हैं । राम राज्य में सभी लोगों के पास ज्ञान होता है । जो परम ज्ञानी होता है उनका समाज में सम्मान किया जाता है ।
- रामराज्य का पर्यावरण ( environment ) - रामराज्य का पर्यावरण प्रदूषण मुक्त तथा स्वास्थ्यवर्धक होता है । वहां चारों ओर पर्यावरण हरा भरा रहता है । आज की तरह प्रकृति का शोषण और दोहन नहींं किया जाता है। रामराज्य के अंदर पशुु पक्षियों को पूरा सम्मान मिलता है। और वे स्वतंत्रता पूर्वक पर्यावरण में विचरण करते हैं । पेड़ों, गाय 🐄 जैसे पशुओं का ख्याल रखा जाता है। राम राज्य के अंदर समुद्रर का जल सीमा से अधिक नहीं बढ़ता है । नदियों का जल स्वच्छ होता है। इसका उपयोग लोग पीने के लिए करते हैं । श्री राम के समय सरयू नदी थी । जिसके घाट चारों ओर हरियाली थी।
- राम राज्य में नेतृत्व ( Leadership ) - रामराज्य का नेता आदर्श विचारों तथा उच्च बुद्धि वाला होता है। रामराज्य का नेता अपने नागरिकों की राय सुनता है और कोई भी फैसला लेते समय नागरिकों की सलाह जरूर लेता हैं। नेता राजनीतिक नैतिकता का पालन जरूर करता है वह अपने गुरु, माता, पिता के सुझाव को सम्मान देता है । राम राज्य के नेता नागरिकों का ख्याल रखता है। वे मंत्रियों का चुनाव बड़े ध्यान से करता है। वे अपने मंत्रिपरिषद का आकार छोटा रखता है ।अर्थात राम राज्य में राजनीति का तात्पर्य आज की राजनीति के बिल्कुल विपरीत है । राम राज्य की राजनीति नैतिकता वाली है।
- राम राज्य में प्रशासन ( Administration ) - रामराज्य का प्रशासन निष्पक्ष होता है। राम राज्य में श्रमिकों का पूरा ध्यान रखा जाता हैं । उनको समय पर वेतन दिया जाता है। श्रमिकों को सेवा के लिए सम्मान दिया जाता है । श्रमिकों को राजा के प्रति क्रोधित होने का अधिकार है लेकिन राजा को नहीं है । देश में साधना पर पहला हक श्रमिकोंं का है। रामराज्य के अंदर राजा आय व्यवस्था का ध्यान रखता है कम खर्च तथा आय में बढ़ोतरी करता है ।
- इस प्रकार रामराज्य एक आदर्श भारतीय समाज का प्रतिबिंब है जिसमें हमारी गौरवशाली भारतीय संस्कृति के दर्शन होते हैं ।
- राम राज्य के प्रति गांधी जी के विचार ( Mahatma Gandhi ) - महात्मा गांधी ने कहा था कि अगर रामराज्य शब्द किसी को बुरा लगे तो मैं उसे धर्मराज्य कहूंगा । रामराज्य का अर्थ हिंदू राज्य से नहीं है। बल्कि ऐसा राज्य जिसमें गरीबों का समान हो तथा सभी कार्य धैर्य पूर्वक किए जाए । जिसमें सभी लोग गुणवान हो। तथा लोकतंत्र की स्थापना हो । जिसमें सभी वर्गों की चिंतन धारा का योग हो ।
- हमारे देश में अयोध्या में राम मंदिर की स्थापना के द्वारा हमारी भारतीय गौरवशाली परंपरा का विकास होगा तथा यहां आने वाले पर्यटकों के द्वारा भारतीय उच्च आदर्श तथा संस्कृति संपूर्ण विश्व में गौरवान्वित होगी ।
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वीरगाथात्मक काव्य रचनाएं - आदिकालीन साहित्य में वीरगाथाओं का विशेष प्रचलन था जिसमें कभी कवि अपने आश्रयदाताओं की वीरता, साहस, शौर्य एवं पराक्रम को अतिरंजित बनाकर प्रस्तुत करते थे। जिस से उनमें जोश एवं शौर्य जाग्रत होता था । युद्धों का वर्णन - आदिकालीन साहित्य से ज्ञात होता है । कि राजा का प्रजा पर ध्यान कम और अपने साम्राज्य विस्तार पर ध्यान ज्यादा था । जिस के कारण आए दिन युद्ध के बिगुल बज उठते थे । जिसमें अनेक लोग युद्ध में वीरगति को प्राप्त हो जाते थें जिसका आदिकालीन कवियों ने बड़ा चढ़ाकर वर्णन किया है । संकुचित राष्ट्रीयता की भावना - उस समय राष्ट्रीयता की भावना का अभाव था । लोग एक दूसरे के स्वार्थ सिद्ध करने में लगे हुए थे । उस समय राष्ट्र का मतलब एक राजा था सामंत की राज्य सीमा थी जिसे वे अपना मानते थे । संपूर्ण भारत को राष्ट्र नहीं समझा गया । इसी कारण पृथ्वीरााज चौहान को शहाबुद्दीन गोरी ने पर परास्त किया । लोक भाषा का साहित्य - सातवीं शताब्दी से दसवीं शताब्दी की अपभ्रंश लोक भाषा के रूप में प्रचलित रही । इस समय के सिद्धाचार्यो , जैनाचार्यों एवं नाथ संप्र...

Beautiful description 👍🏻 well done.
जवाब देंहटाएंThanks a lot 😊
हटाएंNice.
जवाब देंहटाएंThanks 😊
हटाएंThanks a lot 😊
जवाब देंहटाएंVery lovely
जवाब देंहटाएंThanks a lot 😊
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