साहित्य- साहित्य के इतिहास लेखन का मूल उद्देश्य साहित्य के आन्तरिक भाव को जनता तक पहुंचाना है । जिस प्रकार समाज साहित्य को प्रभावित करता है ठीक उसी प्रकार साहित्य भी समाज को प्रभावित करता है । इसलिए साहित्य समाज का दर्पण कहलाता है। इतिहास- इतिहास शब्द ' इति ' और ' हास ' से बना है जिसका अर्थ होता है- " ऐसा ही था " हिन्दी साहित्य के इतिहास के स्रोत- यह स्रोत दो प्रकार के हैं- अन्त: साक्ष्य- इस में प्रकाशित रचनाओं एवं अप्रकाशित रचनाओं का संकलन है। बाह्य साक्ष्य- इस में ताम्रपत्रावली, शिलालेख, वंशावली, जनश्रुतिया, कहावतें,ख्यात एवं वचनिकाऐ होती है। हिन्दी साहित्य के इतिहास लेखन की परम्परा- हिन्दी साहित्य का प्रथम इतिहास फ्रेंच भाषा के विद्वान ' गार्सा द तासी ' ने लिखा था जिसका नाम " इस्तवार द ला लितरेत्युर ऐन्दुई-ए-ऐन्दुस्तानी " है। यह दो भागों में प्रकाशित हुआ। पहला भाग 1839 ई में तथा दुसरा भाग 1847 ई में प्रकाशित हुआ। यह हिन्दी और उर्दू में लगभग 70 कवियों का संग्रह है । हिन्दी साहित्य का दुसरा इतिहास शिवसिंह सेंगर ने लिखा । ...
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