- साहित्य- साहित्य के इतिहास लेखन का मूल उद्देश्य साहित्य के आन्तरिक भाव को जनता तक पहुंचाना है । जिस प्रकार समाज साहित्य को प्रभावित करता है ठीक उसी प्रकार साहित्य भी समाज को प्रभावित करता है । इसलिए साहित्य समाज का दर्पण कहलाता है।
- इतिहास- इतिहास शब्द ' इति ' और ' हास ' से बना है जिसका अर्थ होता है- " ऐसा ही था "
- हिन्दी साहित्य के इतिहास के स्रोत- यह स्रोत दो प्रकार के हैं-
- अन्त: साक्ष्य- इस में प्रकाशित रचनाओं एवं अप्रकाशित रचनाओं का संकलन है।
- बाह्य साक्ष्य- इस में ताम्रपत्रावली, शिलालेख, वंशावली, जनश्रुतिया, कहावतें,ख्यात एवं वचनिकाऐ होती है।
- हिन्दी साहित्य के इतिहास लेखन की परम्परा-
- हिन्दी साहित्य का प्रथम इतिहास फ्रेंच भाषा के विद्वान ' गार्सा द तासी ' ने लिखा था जिसका नाम " इस्तवार द ला लितरेत्युर ऐन्दुई-ए-ऐन्दुस्तानी " है। यह दो भागों में प्रकाशित हुआ। पहला भाग 1839 ई में तथा दुसरा भाग 1847 ई में प्रकाशित हुआ। यह हिन्दी और उर्दू में लगभग 70 कवियों का संग्रह है ।
- हिन्दी साहित्य का दुसरा इतिहास शिवसिंह सेंगर ने लिखा । जिसका नाम " शिवसिंह सरोज " (1883) है। इस में लगभग 1000 कवियों का वर्णन है।
- हिन्दी साहित्य का तीसरा इतिहास डॉ जार्ज ग्रियर्सन ने लिखा। जिसका नाम " द मोर्डन वर्नेक्यूलर लिटरेचर ,आप ऑफ ऑफ हिन्दुस्तान " है। " एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल " से प्रकाशित हुआ ।
- कालक्रमबद्ध इतिहास लेखन की शुरुआत मिश्र बंधुओं द्वारा की गई। यह ग्रंथ " मिश्रबंधु विनोद " के नाम से 1813 में प्रकाशित हुआ ।
- आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने " हिंदी साहित्य के इतिहास" को सुव्यवस्थित कालक्रमानुसार लिखा। यह नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा "हिंदी शब्द सागर" की भूमिका के रूप में 1929 को प्रकाशित हुआ। इस इतिहास को हिंदी साहित्य का प्रामाणिक प्रारंभिक ग्रंथ माना जाता है ।
- आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने " हिंदी साहित्य की भूमिका" के नाम सेे इतिहास लिखा।
- अन्य लेखकों में डॉ रामकुमार वर्मा ने 1938 में व डॉ नगेंद्र, डॉ धीरेंद्र वर्मा तथा डॉ नामवर सिंह इत्यादि ने हिंदी साहित्य के इतिहास में नवीन योगदान दिया।
- R.k pidiyar

NYC bhai
जवाब देंहटाएंThanks 😊
हटाएंअति सुंदर
जवाब देंहटाएंThanks 😊
हटाएंबहुत अच्छी जानकारीयां
जवाब देंहटाएंThanks 😊
हटाएंआपके साहित्य प्रेम की सराहना करता हूं।
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत धन्यवाद सर ।
हटाएं