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आदिकाल ( नाथ साहित्य ) Hindi literature



  • नाथ साहित्य - आदिकाल में सिद्ध साहित्य, जैन साहित्य तथा नाथ साहित्य अत्यधिक महत्वपूर्ण रहा है । हजारी प्रसाद द्विवेदी ने लिखा है - " नाथ पंथ या नाथ संप्रदाय, सिद्धमत, सिद्धमार्ग, योगमार्ग, योग संप्रदाय व अवधूत संप्रदाय के नाम से प्रसिद्ध है ।" ये मुख्यत: दो संप्रदायों के नाम से जाना जाता है - 1. सिद्धमत 2. नाथमत । इन दो भागो के नाम से पुकारे जाने का कारण है । पहला मत्स्येन्द्र तथा दुसरा गोरखनाथ ।
  1. गोरखनाथ - यह नाथ संप्रदाय के सशक्त प्रणेता थे इन का समय 845 ईसवी माना जाता है । गोरखनाथ का हठयोग भक्ति काल का हठयोग है । हठयोग का तात्पर्य-  ' ह ' का अर्थ ' सूर्य ' तथा 'ठ' का अर्थ चंद्रमा है, अर्थात सूर्य चंद्र को जाग्रत रखता है । हठयोग में  मन की शुद्धि पर ध्यान दिया जाता है ।
  2. चर्पटनाथ- यह गोरखनाथ के शिष्य थे । जो बाह्य आडम्बबरों को रखने वाले साधुओं को फटकारते थे ।
  3. चौरंगी नाथ - ये मत्स्येन्द्र नाथ के  शिष्य और गोरखनााथ के गुरू भाई थे। इनकी रचना - " प्राण साकली " 
  • हिंदी साहित्य में नाथ संप्रदाय का प्रभाव - 
  1. बौद्ध धर्म के प्रचार को कम करना, ईश्वरवाद में आस्था का प्रसार करना तथा अंतः साधना पर जोर देना ।
  2. भारतीय मनोवृति के अनुकूल आचरण कर जन जीवन में स्थान बनाना ।
  3. योग क्रियाओं का समावेश करके अनाचारी जीवन के प्रति वितृष्णा का भाव वर्कर नाथों के जीवन को सदाचारी बनाना ।
  • आदिकाल का गद्य साहित्य - आदिकाल के साहित्य में गद्य रचना बहुत लिख जाती थी किंतु कुछ कवियों ने गद्य-पद्य ( चंपूकाव्य) साहित्य लिखकर साहित्य के खजाने को अद्भुत रत्न दिए है ।
  1. "राहुलवेल" - इसका रचनाकाल दसवीं शताब्दी माना जाता है इसके रचनाकार रोड़ा नामक कवि है यह गद्य पद्य मिश्रित (चंपू काव्य) की प्राचीनतम रचना  है इसमें राउल नामक नायिका के नख- शिख वर्णन का प्रसंग है ।
  2. उक्ति व्यक्ति प्रकरण - इस ग्रंथ की रचना महाराज गोविंद चंद्र केेे शासन काल में 12वीं शताब्दी में दामोदर शर्मा ने की ।
  3. "वर्ण रत्नाकर" - इस ग्रंथ की रचना ज्योति शंकर ठाकुर मैथिली कवि ने की । इस ग्रंथ का प्रकाशन डॉ सुनीति कुमार चटर्जी और पंडित बबुआ मिस्र के संपादन में बंगाल एशियाटिक सोसाइटी से हुआ ।
R.k pidiyar 


टिप्पणियाँ

  1. Bhaiya आपकी ये अवधारणात्मक और तथ्यात्मक जानकारी हिंदी साहित्य की प्रासंगिक समस्याओं की बुनियादी समझ की भूमिका तैयार करती है।

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  2. Beautiful topic, I m glad to know that in this type of modernization you are spreading the knowledge of our Indian culture

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