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आदिकाल ( जैन साहित्य ) Hindi literature


  1. जैन साहित्य - आठवींं शताब्दी में जैन धर्मावलंबियों ने अपने मत का प्रचार करना शुरू कर दिया। इन्होंने जैन तीर्थंकरों के जीवन चरित्र व वैष्णव अवतारों की कथाओं को अपने सााित्य का आदर्श बनाया। अपभ्रंश भाषा में रचित साहित्य के रचनाकारों के प्रमुख कवि - 
  • स्वंभू - इनका समय 783 ईसवी माना गया है इनकी 3 अपभ्रंश की रचनाएं उपलब्ध है - " पउम चरिउ " , " रिटठ् नेमिचरिउ ", " स्वयंभू छंद ",
  • पुष्यदंत- इनका समय दसवीं शताब्दी के आसपास रहा है इन को " अपभ्रंश भाषा का व्यास " कहा जाता है । यह मान्यखेत के प्रतापी राजा महामात्य भीत के सभा कवि थे । इनके प्रमुख 3 ग्रंथ है - " णयकुुुुमार चरिउ ", " महापुराण", " जसहर चरिउ ",
  • धनपाल- इनका समय दसवीं शताब्दी रहा। यह धक्कड़ वैैैश्य  कुल के थे। इनका मूल उद्देश्य श्रुत पंचमी व्रत के महात्म्य प्रतिपादित करना है इनकी रचना " भविष्यतकहा " है जो अपभ्रंश का लोकप्रिय महाकाव्य है ।
  • देवसेन- आचार्य देव सेन 933 ईसवी के कवि है अपभ्रंश में " श्ररावकार " इन की प्रसिद्ध रचना है इसमें 250 दोहों में श्रावक धर्म का प्रतिपादित किया सत्ता गृहस्थ के कर्त्तव्यो को भी स्थान दिया है ।
  • शालिभद्र सूरी - इनका समय 1184 ईसवी के आसपास माना जाता है जैन साहित्य मैं रास परंपरा का प्रथम ग्रंथ " भरतेश्वर बाहुबली " को माना जाता है यह खंड काव्य 205 छंदों में वर्णित है ।
  • सोमप्रभू सूरी - ये " कुमारपाल " नामक काव्य के रचयिता है । इन्होंने संस्कृत मिश्रित प्राकृत काव्य लिखा ।
  • जैनाचार्य मैरुतुंग - इनकी  प्रसिद्ध रचना " प्रबंध चिंतामणि " है।
  • आसगु- इनकी रचना " चंद्रबाला रास " नामक लघु खंडकाव्य है । इनकी यह रचना 12वीं शताब्दी की मानी जाती है ।
  • जिनधर्म सूरी - इनकी रचना " स्थूलभद्र रास " है। जो 1209 ईस्वी में लिखी गई ।
  • हेमचंद्र - इनका बचपन का नाम चंगदेव था इन्हें " अपभ्रंश भाषा का पाणिनि " कहा जाता है । प्रमुख रचना - " शब्दानुशासन ", छंदोनुशासन " ।
  • अन्य- विजयसेन सूरी की " खेतागिरी " सुमति की " नेमिनाथ रास " अपभ्रंश की रचना है।
  • R.k pidiyar

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