नाथ साहित्य - आदिकाल में सिद्ध साहित्य, जैन साहित्य तथा नाथ साहित्य अत्यधिक महत्वपूर्ण रहा है । हजारी प्रसाद द्विवेदी ने लिखा है - " नाथ पंथ या नाथ संप्रदाय, सिद्धमत, सिद्धमार्ग, योगमार्ग, योग संप्रदाय व अवधूत संप्रदाय के नाम से प्रसिद्ध है ।" ये मुख्यत: दो संप्रदायों के नाम से जाना जाता है - 1. सिद्धमत 2. नाथमत । इन दो भागो के नाम से पुकारे जाने का कारण है । पहला मत्स्येन्द्र तथा दुसरा गोरखनाथ । गोरखनाथ - यह नाथ संप्रदाय के सशक्त प्रणेता थे इन का समय 845 ईसवी माना जाता है । गोरखनाथ का हठयोग भक्ति काल का हठयोग है । हठयोग का तात्पर्य- ' ह ' का अर्थ ' सूर्य ' तथा 'ठ' का अर्थ चंद्रमा है, अर्थात सूर्य चंद्र को जाग्रत रखता है । हठयोग में मन की शुद्धि पर ध्यान दिया जाता है । चर्पटनाथ- यह गोरखनाथ के शिष्य थे । जो बाह्य आडम्बबरों को रखने वाले साधुओं को फटकारते थे । चौरंगी नाथ - ये मत्स्येन्द्र नाथ के शिष्य और गोरखनााथ के गुरू भाई थे। इनकी रचना - " प्राण साकली " हिंदी साहित्य में नाथ संप्रदाय का प्रभाव - बौद्ध धर्म के प्रचार को क...
Very nice
जवाब देंहटाएंThanks 😊
हटाएंAmazing topic. Thanks for sharing. My topic is health and weight loss. It will be kind enough if you can also see my page.
जवाब देंहटाएंMy link is: https://bit.ly/32bP6yW
Thanks a lot for your kind support
Best Regards
BOMSOMGUYS.BLOGSPOT.COM
https://bit.ly/32bP6yW
Thanks a lot 😊
हटाएं