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आदिकाल ( Hindi literature )


  • आदिकालीन साहित्य का भाषा स्वरूप- आदिकाल की मूल भाषा अपभ्रंश ही साहित्यिक भाषाा के रूप में उभरकर आ रही थी। अपभ्रंश की साहित्यिक सामग्री की विवेचना करें तो हमें चार रूप मिलते हैं -
  1. लोक भाषा में लिखित अपभ्रंश साहित्य ।
  2. राजस्थानी मिश्रित अपभ्रंश साहित्य ।
  3. मैथिली मिश्रित अपभ्रंश साहित्य ।
  4. खड़ी बोली मिश्रित देसी भाषा साहित्य ।
  • अपभ्रंश साहित्य - अलौकिक अपभ्रंश का साहित्य- 
(1) सिद्ध साहित्य
(2) जैन साहित्य
(3) नाथ साहित्य

  1. सिद्ध साहित्य - इस साहित्य के प्रमुख कवि -
  • सरहप्पा - सरहपाद इस समय के प्रमुख सिद्ध माने जाते हैं इनका समय 759 ईसवी माना गया है । इन्होंने 32 ग्रंथों की रचना की । इन की प्रसिद्ध रचना - " दोहाकोश " व " चर्यापद " 
  • शबरपा - शबरो का सा जीवन यापन करने के कारण इनका   नाम शबरपा कहलाया। " चर्यापद " उनकी प्रमुख रचना है ‌।
  • ‌लुइपा - यह शबरपा के शिष्य थे । इन की पंक्तियां - " कौआ तरुवर पंच विडाल, चंचल चीए पइठा काल "।
  • डोम्बिपा- इनका समय 840ई.  माना गया है इन गुरु का नाम विरूपा था । इन की प्रसिद्ध रचना - " डोम्बबि- गीतिका " व " योगचर्या " 
  • कण्हपा - इनका समय 820 ईसवी माना जाता है । इनका जन्म कर्नाटक में हुआ । इनके गुरु का नाम जालंधरपा था ।
  • कुक्कुरिया - यह कपिलवस्तु के ब्राह्मण थे चर्पटिया उनके गुरु थे । 
  • आदि सिद्ध साहित्य के प्रमुख कवि हैं ।
R.k pidiyar
        

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