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हिन्दी साहित्य के आदिकाल का नामकरण

  • राहुल सांकृत्यायन - ने हिंदी साहित्य के आदिकाल को " सिद्ध सामंत " काल कहा है ।
  • डॉ रामकुमार वर्मा- ने इस काल को " सन्धि व चारण " कहा है। इस नामकरण के दो कारण है 1. संधि काल दो भाषाओंं की संधियों का काल था। 2. चारण काल चारण कवियों द्वारा राजाओं की यशोगाथा को प्रकट करता है।
  • आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी - ने आदिकाल को " बीजवपन "  काल कहा है ।
  • श्री चंद्रधर शर्मा गुलेरी- ने आदििाल को " अपभ्रंश "  काल कहा है उन्होंनेे बताया। कि हिन्दी की प्रारंभिक स्थिति अपभ्रंश भाषा के साहित्य से शुरू होती है।
  • विश्वनाथ प्रसाद मिश्र- ने इस काल को " वीरकाल " कहा है।
  • डॉ नगेंद्र - ने हिंदी साहित्य के प्रथम काल को " आदिकाल " कहा है।
  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल - ने निम्नलिखित 12 ग्रंथों के आधार पर हिंदी के प्रथम काल को " वीरगाथाकाल " कहा है।
  1. विजयपाल रासो ( नल्लसिंह )
  2. हमीर रासो (  शाङर्गधर )
  3. खुमान रासो ( दलपत विजय )
  4. बीसलदेव रासो ( नरपति नाल्ह )
  5. पृथ्वीराज रासो ( चंदबरदाई )
  6. चंद्रप्रकाश ( भट्ट केदार ) 
  7. जय मयंक जस चंद्रिका ( मधुकर)
  8. परमाल रासो ( जगनिक कवि )
  9. खुसरो की पहेलियां ( अमीर खुसरो )
  10. कीर्तिलता ( विद्यापति )
  11. कीर्ति पताका ( विद्यापति ) 
  12. विद्यापति पदावली ( विद्यापति )
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